सोमवार, 2 अक्टूबर 2023

रीता दास राम

संत नहीं होता ख़ुदा

संत नहीं होता ख़ुदा
बहुत अज़ीज़ भी नहीं
ना ही वह 
जिससे नहीं चलती दुनिया 
ख़ुदा ख़ुदा है 
अपनी पूरी ख़ुदाई के साथ 
ग़म नहीं उसका साथ नहीं 
अकेले ही 
जीवन की जद्दोजहद क्या कम रूमानी है 
सुना है यहीं कहीं होता है... 
पर दिखता नहीं है ख़ुदा।  

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