संत नहीं होता ख़ुदा
संत नहीं होता ख़ुदाबहुत अज़ीज़ भी नहीं
ना ही वह
जिससे नहीं चलती दुनिया
ख़ुदा ख़ुदा है
अपनी पूरी ख़ुदाई के साथ
ग़म नहीं उसका साथ नहीं
अकेले ही
जीवन की जद्दोजहद क्या कम रूमानी है
सुना है यहीं कहीं होता है...
पर दिखता नहीं है ख़ुदा।